बुधवार, जुलाई 22, 2020

क्रिया-विशेषण(Adverb)

क्रिया की विशेषता बताने वाले को क्रिया-विशेषण कहते है| क्रिया विशेषण के पांच प्रकार है |

रीतिवाचक-जिससे  क्रिया करने के तरीकें का बोध होता है उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते है|

इस क्रियाविशेषण से निश्चय, अनिश्चय,कारण निषेध का बोध होता है |धीरे-धीरे,शीघ्र,अचानक,शायद, जरूर,नही,ठीक,ऐसे,सहसा,हाँ,मत,वैसे,सच,कदाचित,नि:संदेह,हाँ,क्यों 

मेरी कार के सामने अचानक आ गया |

•गुणवाचक क्रिया-विशेषण- -जो क्रिया के गुण का बोध करवाएं उसे गुणवाचक क्रिया के कहते है |
•राजेश मीठा बोलता है |
• कार तेज दौड़ती है
•
•परिणाम वाचक क्रिया-विशेषण- जिन शब्दों से क्रिया की मात्रा का बोध हो उसे परिणाम वाचक क्रिया-विशेषण कहते है |
•वह बहुत तेज दौड़ता है|
•वह बहुत खाता है |
•स्थानवाचक क्रिया-विशेषण- जिस शब्द से क्रिया के स्थान का बोध हो उसे स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहते है|
•ऊपर,निचे,दायें-बाएं ,आमने-सामने,सर्वत्र,अन्दर ,भीतर,आस-पास,यहीं,आगे|

मेरा घर ऊपर है |

हम आसपास रहते है |

अन्दर जाओं

तुम यहीं रूक| 

काल वाचक क्रिया-विशेषण-  जो क्रिया के होने के समय का बोध करता है |

•मैं तुम्हारे घर कल आया था
•तुम कब आये |
•इतिहास को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता |

कोई टिप्पणी नहीं:

भारत के विकास में हिन्दी का योगदान

  भारत के अभ्युदय और विकास की महायात्रा में हिन्दी का योगदान भाषा केवल विचारों के संप्रेषण का माध्यम मात्र नहीं होती; वह किसी राष्ट्र की आत्...