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बुधवार, अक्टूबर 29, 2025

हिंदी व्याकरण इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी

हिंदी व्याकरण और बोध: इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी

नमस्ते! आज हम हिंदी व्याकरण और बोध के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करेंगे। यह एक इंटरैक्टिव क्विज़ है।

निर्देश:
1. प्रत्येक प्रश्न के लिए एक विकल्प चुनें।
2. "उत्तर जाँचें" बटन पर क्लिक करें।
3. आपको तुरंत बता दिया जाएगा कि आपका उत्तर सही है या गलत।


खंड 'क': व्याकरण प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: निम्नलिखित में से 'आशीर्वाद' का शुद्ध वर्तनी रूप चुनिए।

प्रश्न 2: 'नीलकमल' (नीला है जो कमल) शब्द में कौन-सा समास है?

प्रश्न 3: 'अत्याचार' शब्द में कौन-सी संधि है?

प्रश्न 4: 'नीलकमल' शब्द में कौन-सा समास है?

प्रश्न 5: 'वैज्ञानिक' शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय हैं-

प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'तद्भव' है?

प्रश्न 7: 'आकाश' का पर्यायवाची शब्द *नहीं* है-

प्रश्न 8: 'उत्थान' शब्द का सही विलोम है-

प्रश्न 9: 'जो सब कुछ जानता हो' - वाक्यांश के लिए एक शब्द है-

प्रश्न 10: 'बुढ़ापा' शब्द कौन-सी संज्ञा का उदाहरण है?

प्रश्न 11: 'अलि' और 'अली' शब्द-युग्म का सही अर्थ है-

प्रश्न 12: 'शायद आज वर्षा हो।' - वाक्य किस काल का है?


खंड 'ख': पठित बोध

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न 13 से 17) के उत्तर दीजिए-

अनुशासन जीवन का एक अनिवार्य अंग है। यह हमें नियमों का पालन करना सिखाता है। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है। एक अनुशासित विद्यार्थी ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाता है। प्रकृति भी अनुशासन का पालन करती है। सूर्य का समय पर उगना और अस्त होना, ऋतुओं का बदलना, यह सब अनुशासन के ही उदाहरण हैं। जो व्यक्ति अनुशासनहीन होता है, उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

प्रश्न 13: गद्यांश के अनुसार जीवन का अनिवार्य अंग क्या है?

प्रश्न 14: विद्यार्थी जीवन में किसका विशेष महत्व है?

प्रश्न 15: प्रकृति के अनुशासन का उदाहरण है-

प्रश्न 16: 'अनुशासनहीन' का क्या अर्थ है?

प्रश्न 17: इस गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा?

सोमवार, सितंबर 18, 2023

अपठित भाग 2 गद्यांश

बंगाल की शस्य- श्यामला धरती का सौंदर्य अविस्मरणीय है । इसके मनोहर और उन्मुक्त सौंदर्य को प्रतिभाशाली रचनाकार अपने गीतों, निबंधों और कविताओं में बांधने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन इसके मायावी और लोकोत्तर आकर्षण का रंच मात्र ही रुपायित करने में सफल हो पाए हैं। अविभाजित बंगाल का सौंदर्य किसी भी संवेदनशील मस्तिष्क के भीतर हलचल पैदा कर सकता है । चांदी सी चमकती मीलों लंबी नहरों और नदियों के बीच पन्नों की तरह चमकते हरे-भरे खेतों के चित्र संवेदनशील मन को अपूर्व आनंद से भर देते हैं । हरे-भरे खेतों में पके दानों की लहलहाती सुनहरी फसल, हवा में फुसफुसाते लंबे ताड़ के वृक्ष और साल की पत्तियों की बहती हुई मंद-मंद हवा, कंचनजंघा के उत्तुंग शिखर, सुंदरवन के घने जंगल, दीघा के सुंदर रेतीले समुद्र तट और उत्तर बंगाल के हरे-भरे चाय के बागान आंखों में रचे-बसे रहते हैं । प्राकृतिक छटाओं से भरी-पूरी यह धरती युगों से महान लेखकों, कवियों और कलाकारों को प्रेरित करती रही है । इस अनोखे वरदान के केवल वही पात्र हैं, जिन्हें धरती पर पैदा होने का सौभाग्य मिला है अथवा वे हैं जो अविभाजित बंगाल में रह चुके हैं।

सामान्य ज्ञान पर प्रश्नोत्तरी Quiz

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अपठित भाग 1

हिंदी के बारे में या तो उसके विरोध के बारे में जब भी कोई हलचल होती है, तो राजनीति का मुखौटा ओढ़े रहने वाले भाषा व्यवसायी बेनकाब होने लगते हैं। उनकी बेचैनी समझ में नहीं आती। संविधान में स्पष्ट प्रावधानों के बाद भी यह विश्वास का माहौल बनता क्यों हैं? यहां हम केवल एक ही प्रावधान को याद करें। संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा गया है। 'संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाएं, उसका विकास करें, जिससे वह भारत की सामाजिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिंदुस्तानी और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द भंडार के लिए मुख्यत: संस्कृत से और गौणत: तथा अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करें।' यही सब देखकर हिंदी के विषय में अक्सर यह लगने लगता है कि जैसे संविधान के संकल्पों का निष्कर्ष कहीं खो गया है और हम निर्माताओं के आशय से कहीं दूर भटक गए हैं। सहज ही मन में यह प्रश्न उठते हैं कि हमने संविधान के सपने को साकार करने के लिए क्या किया? क्यों नहीं हमारे कार्यक्रम प्रभावी हुए? क्यों और कैसे अंग्रेजी भाषा की मानसिकता हम पर और हमारी युवा एवं किशोर पीढ़ी पर इतनी हावी हो चुकी है कि इस मिट्टी से जन्मी हमारी अपनी भाषाओं की अस्मिता और भविष्य संकट में प्रतीत होता है? शिक्षा में, व्यापार और व्यवहार में, संसदीय, शासकीय एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं को वर्चस्व क्यों नहीं मिल पा रहा?

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भारत के विकास में हिन्दी का योगदान

  भारत के अभ्युदय और विकास की महायात्रा में हिन्दी का योगदान भाषा केवल विचारों के संप्रेषण का माध्यम मात्र नहीं होती; वह किसी राष्ट्र की आत्...