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बुधवार, जून 26, 2024

डिजिटल युग और मैं ( बोर्ड के द्वारा जारी प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2023 )

आलेख - 1 

 डिजिटल युग ने मेरे जीवन को अभूतपूर्व गति से बदल दिया है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने ज्ञान, संचार और मनोरंजन के अवसरों की एक नई दुनिया खोल दी है।

सकारात्मक प्रभाव:

  • ज्ञान और सूचना: मैं किसी भी विषय पर जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकता हूं, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से सीख सकता हूं, और दुनिया भर के विशेषज्ञों से जुड़ सकता हूं।
  • संचार और सहयोग: मैं सोशल मीडिया, वीडियो कॉलिंग और ईमेल के माध्यम से दोस्तों, परिवार और सहयोगियों से आसानी से जुड़ सकता हूं।
  • मनोरंजन और उत्पादकता: मैं ऑनलाइन गेम खेल सकता हूं, फिल्में देख सकता हूं, संगीत सुन सकता हूं, और उत्पादकता बढ़ाने वाले ऐप्स का उपयोग कर सकता हूं।

नकारात्मक प्रभाव:

  • गोपनीयता और सुरक्षा: डेटा उल्लंघनों और ऑनलाइन खतरों से मेरी व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीयता खतरे में है।
  • डिजिटल लत: अत्यधिक स्क्रीन समय मेरी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • सूचना अधिभार: लगातार सूचनाओं से बमबारी के कारण ध्यान केंद्रित करना और महत्वपूर्ण जानकारी को फ़िल्टर करना मुश्किल हो जाता है।
  • निष्कर्ष:

डिजिटल युग ने मेरे जीवन को कई मायनों में बेहतर बनाया है, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। ज़िम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में, मुझे इन चुनौतियों से अवगत रहना चाहिए और उनका सामना करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

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आलेख - 2 

डिजिटल युग ने मेरे जीवन को अभूतपूर्व गति से बदल दिया है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने ज्ञान, संचार और मनोरंजन के अद्वितीय अवसर प्रदान किए हैं।

सकारात्मक प्रभाव:

  • ज्ञान और सूचना: 2024 में, 5.44 अरब लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जिससे मुझे विशाल ज्ञान भंडार तक पहुंच मिलती है। मैं ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से सीख सकता हूं और दुनिया भर के विशेषज्ञों से जुड़ सकता हूं।
  • संचार और सहयोग: 5.07 अरब लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, जिससे मैं दोस्तों, परिवार और सहयोगियों से आसानी से जुड़ सकता हूं। यह वैश्विक सहयोग और संचार को सक्षम बनाता है।
  • मनोरंजन और उत्पादकता: स्मार्टफोन मनोरंजन और उत्पादकता बढ़ाते हैं। मैं ऑनलाइन गेम खेल सकता हूं, फिल्में देख सकता हूं, संगीत सुन सकता हूं, और टास्क मैनेजमेंट ऐप का उपयोग कर सकता हूं।

नकारात्मक प्रभाव:

  • गोपनीयता और सुरक्षा: डेटा उल्लंघनों में 65% वृद्धि हुई है, जिससे गोपनीयता और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
  • डिजिटल लत: 15-24 वर्षीय 70% किशोर इंटरनेट के बिना नहीं रह सकते, जो डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा दर्शाता है।
  • सूचना अधिभार: प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 7 घंटे डिजिटल मीडिया का उपयोग करता है, जिससे ध्यान केंद्रित करना और महत्वपूर्ण जानकारी को फ़िल्टर करना मुश्किल हो जाता है।

निष्कर्ष:

डिजिटल युग ने मेरे जीवन को बेहतर बनाया है, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। ज़िम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में, मुझे इन चुनौतियों से अवगत रहना चाहिए और उनका सामना करना चाहिए।

 

 

सोमवार, दिसंबर 02, 2019

1853 का चार्टर अधिनियम

1- यह अधिनियम अंतिम चार्टर अधिनियम था |
2 - गवर्नर जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्य अलग कर दिया गया ।
3-  परिषद पहली बार संसद की तरह व्यवहार करने लगी ।
4- गवर्नर जनरल की परिषद में 6 नए सदस्य जोड़े गए। जिन्हें पार्षद कहा जाता था ।
5 परिषद् में पहली बार स्थानीय प्रतिनिधित्व आरंभ किया गया । अर्थात परिषद में चार सदस्यों का चुनाव बंगाल, मद्रास , बंबई और मद्रास  की सरकारों के द्वारा किया जाना था। ।
6. इसी अधिनियम के कारण पहली बार (1854) भारतीयों को सिविल सेवा में जाने का मौक़ा मिला ।कह सकते है , पहली बार सिविल सेवा की भरती एवं चयन हेतु  खुली प्रतियोगिता आरम्भ की‌ गयी ।

शनिवार, नवंबर 02, 2019

केंद्रीय सूचना आयोग


संविधान के  अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्राप्त बोलने के अधिकार में सूचना का अधिकार अंतर्निहित है । इस बात को सर्वोच्च न्यायालय ने अनेको बार अपने निर्णयों से सिद्ध किया है। उसके अलावा अनेको जनआंदोलों के द्वारा बेहतर लोकतंत्र के लिए सूचना के अधिकार की माँग जनता के द्वारा की जाती रही है। इन सब प्रयासों से बाध्य होकर  सरकार को जन सूचना अधिकार  अधिनियम 2005 लाया जिसे दोनों सदनों की मंजूरी के बाद 15 जून 2005 को राष्ट्रपति  महोदय ने भी अपनी मंजूरी दे दी इस तरह 12 अक्टूबर 2005 को यह कानून देश भर में लागू हो गया |इसी अधिनियम के तहत केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोगों का गठन किया गया | सूचना आयोग का गठन शासकीय राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से की गयी थी,इस कारण यह एक उच्च प्राधिकार युक्त निकाय है न की संवैधानिक निकाय | यह कार्मिक मंत्रालय के अंतर्गत आता है |

सुचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित 11 आयुक्त होते है ,जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिश पर की जाती है | इस समिति में प्रधानमंत्री के अलावा लोकसभा में विपक्ष का नेता और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक कैबिनेट मंत्री | 

मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्त बनने के लिए योग्यता मुख्यतः यह है कि-

 वह सार्वजनिक जीवन का पर्याप्त अनुभव रखता हो तथा उसे विधि,विज्ञान सामाजिक जीवन का अनुभव हो वह संसद एवं किसी राज्य विधानमंडल का सदस्य न हो|

उसे किसी भी राजनैतिक दल से जुड़ा नहीं होना चाहियें |

कार्यकाल - मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल 25 जुलाई 2019  से पहले 5 वर्ष एवं 65 वर्ष की आयु जो पहले हो थी परन्तु 25 जुलाई 2019 ( सूचना अधिकार  संसोधन अधिनियम 2019) के बाद कार्यकाल निर्धारण का अधिकार केंद्र सरकार को दे दिया  गया जिसका कुछ लोगो के द्वारा विरोध किया जा रहा है
पहले वेतन और भत्ते मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान मुख्य सुचना आयुक्त के थे एवं अन्य आयुक्तों के भत्ते  अन्य निर्वाचन आयुक्तों के समान ही थे | परन्तु सूचना अधिकार संसोधन अधिनियम 2019 के द्वारा अब इसका निर्धारण केन्द्र सरकार को करना है |
(सूचना अधिकार  संसोधन अधिनियम 2019 का विपक्षी दलों एवं कुछ सामाजिक कार्यकता विरोध कर रहे है कि सरकार सूचना आयोग को कमजोर कर रही है जबकि सरकार का कहना है कि  वह केवल वेतन भत्ते एवं कार्यकाल में संशोधन कर रही है जिसके कारण इसकी स्वायत्ता कम नहीं होगी |)

कार्य --- अगर लोक प्राधिकारी के द्वारा अधोलिखित कार्यवाही की गयी होतो उस मामले को केंद्रीय सूचना आयोग के संज्ञान में लाया जाता है |--
1 सूचना देने से मना कर दिया गया हो या गलत जानकारी दी गयी हो
2 जानकारी निर्धारित समय में प्राप्त न हुई हो
3 अगर किसी को लगता है कि सूचना के एवज में मांगी गयी फीस मनमाने ढंग से मांगी गयी है अर्थात प्रार्थना कर्ता को हतोत्साहित करने के लिए किया हो |

शक्तियां--  जाँच के समय आयोग को दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त है किसी भी लोक प्राधिकारी को आयोग में बुलाना ,दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए आदेश देना एवं उसकी जाँच करना |

किसी न्यायालय या कार्यालय से सार्वजानिक दस्तावेज़ को मंगाना |
अगर आयोग को लगता है कि लोक प्राधिकारी ने जानबूझ कर गलत  सूचना  दी है या सूचना को छुपाया है तो उस लोकप्राधिकारी पर 250 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से अर्थ दण्ड लगा सकता है जो अधिकत्तम 25 हजार रूपये तक हो सकता है |

सोमवार, अक्टूबर 28, 2019

केंद्रीय सतर्कता आयोग ( CVC)


संथानम समिति की शिफारिश( 1962- से 1964)  पर 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग का गठन किया गया |वर्तमान में यह एक सांविधिक निकाय है परन्तु 2003 से पहले यह न सांविधिक निकाय था न विधिक निकाय था |
केंद्रीय सतर्कता आयोग विधेयक संसद के दोनों सदनों से सत्र 2003 में पारित हुआ और राष्ट्रपति जी कि मंजूरी 11 सितम्बर 2003 को मिली ,इसी दिन से केंद्रीय सतर्कता आयोग एक सांविधिक निकाय बन गया |
2004 में भारत सरकार ने इसे नामित एजेंसी के रूप में अधिकृत  किया जो भष्ट्राचार की जाँच,भष्ट्राचार के खुलासे एवं अभियुक्त पर उपर्युक्त कार्यवाही की अनुशंसा करेगी | अगर सरकार इसकी अनुशंसा को नहीं मानती है तो उसे इसका लिखित कारण देना पड़ेगा |
इसका चरित्र न्यायिक है इसे दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त है यह केंद्र सरकार के किसी भी प्राधिकरण से कोई भी जानकारी मांग सकता है |
आयोग वर्ष भर में किये गये कार्यो के विविरण की रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन में प्रस्तुत करता है  |
प्रारंभ में केंद्रीय सतर्कता आयोग एक सदस्यीय निकाय था परन्तु 25 अगस्त 1998 को राष्ट्रपति द्वारा पारित एक  
 अध्यादेश से यह बहु सदस्यीय निकाय बन गया |वर्तमान समय में इसके 3 सदस्य है |
आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा तीन सदस्यीय समिति की शिफारिश पर की जाती है |
इस समिति में प्रधानमंत्री( अध्यक्ष ) , गृहमंत्री( सदस्य ) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ( सदस्य )  होगें |
आयोग के आयुक्त  एवं सहायक आयुक्तों का कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष जों भी पहले रहेगा |
अपने कार्यकाल के बाद वें केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद के योग्य नहीं रहेगें |
वर्तमान में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त  श्री शरद  कुमार है ये राष्ट्रीय जाँच एजेंसी(NIA) के अध्यक्ष भी रह चुके है |   

हिन्दी ओलंपियाड की कक्षा 8 की अभ्यास पुस्तिका

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