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बुधवार, अक्टूबर 30, 2019

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो NCRB

अपराध और अपराधियों की सूचना देने के लिए दुनिया भर में अनेकों सस्थाएँ कार्य करती है । यह सूचनाएइस कारण संग्रहित की जाती है जिससे खोज कर्ताओं को अपराध एवं अपराधियों की पुरानी कड़ियों को जोड़ने में  सहायता मिल सकें।
भारत में इस तरह की संस्था ‘राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो’ NCRB है। NCRB की स्थापना 1986 में टंडन समिति की राष्ट्रीय पुलिस कमीशन एवं गृहमंत्रालय की टास्क फ़ोर्स 1985 की सिफ़ारिशों के आधार पर गृहमंत्रालय के अधीन किया गया ।
 हाल ही में NCRB ने 2017 के अपराधों के आँकड़े प्रस्तुत किए है जो दो वर्ष के विलंब से प्रस्तुत किए गये।
   अपराध से संबंधित आँकड़े इस प्रकार है|
राज्य ख़िलाफ़  अपराध सबसे  अधिक हरियाणा में हुआ उसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य के ख़िलाफ़ अपराध में तीसरे स्थान पर तमिलनाडु था
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में
1  प्रथम स्थान पर उत्तर प्रदेश
2  दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र
3  पश्चिम बंगाल
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों के मामलों में सबसे ज़्यादा घरेलू हिंसा के मामले 33.2%
दूसरे स्थान पर महिला की शीलता को अपमानित करने के मामले 27.37
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के  तीसरे सबसे ज़्यादा मामले आयें है अपहरण के 21%
बलात्कार के मामले 7% 
मध्य प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार की सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किए गये एक लाख महिलाओं में से 14.7
महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया ।
बलात्कार के मामले में दूसरा स्थान छत्तीसगढ़ का रहा। जहाँ एक लाख पर 14.6 महिलाओं के साथ रेप हुआ।
भारत की राजधानी रेप की राजधानी बन गई हैl यहाँ एक लाख में से 12.5 महिलाओं के साथ रेप हुआ है 

रिपोर्ट में बताया गया है कि 277 महिलाओं को रेप के बाद मार दिया गया । 150 बच्चों को रेप के बाद  मार दिया गया ।

रिपोर्ट के अनुसार 2016 के मुक़ाबले 2017में  अपराध के मामले 3.6 %   अधिक दर्ज किये  गये।
अपहरण के मामले 2016 के मुक़ाबले 9% बढ़े है परन्तु हत्या के मामले 5.9% घाटे है । 




सोमवार, अक्टूबर 28, 2019

केंद्रीय सतर्कता आयोग ( CVC)


संथानम समिति की शिफारिश( 1962- से 1964)  पर 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग का गठन किया गया |वर्तमान में यह एक सांविधिक निकाय है परन्तु 2003 से पहले यह न सांविधिक निकाय था न विधिक निकाय था |
केंद्रीय सतर्कता आयोग विधेयक संसद के दोनों सदनों से सत्र 2003 में पारित हुआ और राष्ट्रपति जी कि मंजूरी 11 सितम्बर 2003 को मिली ,इसी दिन से केंद्रीय सतर्कता आयोग एक सांविधिक निकाय बन गया |
2004 में भारत सरकार ने इसे नामित एजेंसी के रूप में अधिकृत  किया जो भष्ट्राचार की जाँच,भष्ट्राचार के खुलासे एवं अभियुक्त पर उपर्युक्त कार्यवाही की अनुशंसा करेगी | अगर सरकार इसकी अनुशंसा को नहीं मानती है तो उसे इसका लिखित कारण देना पड़ेगा |
इसका चरित्र न्यायिक है इसे दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त है यह केंद्र सरकार के किसी भी प्राधिकरण से कोई भी जानकारी मांग सकता है |
आयोग वर्ष भर में किये गये कार्यो के विविरण की रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन में प्रस्तुत करता है  |
प्रारंभ में केंद्रीय सतर्कता आयोग एक सदस्यीय निकाय था परन्तु 25 अगस्त 1998 को राष्ट्रपति द्वारा पारित एक  
 अध्यादेश से यह बहु सदस्यीय निकाय बन गया |वर्तमान समय में इसके 3 सदस्य है |
आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा तीन सदस्यीय समिति की शिफारिश पर की जाती है |
इस समिति में प्रधानमंत्री( अध्यक्ष ) , गृहमंत्री( सदस्य ) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ( सदस्य )  होगें |
आयोग के आयुक्त  एवं सहायक आयुक्तों का कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष जों भी पहले रहेगा |
अपने कार्यकाल के बाद वें केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद के योग्य नहीं रहेगें |
वर्तमान में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त  श्री शरद  कुमार है ये राष्ट्रीय जाँच एजेंसी(NIA) के अध्यक्ष भी रह चुके है |   

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