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शनिवार, नवंबर 09, 2019

1833 का चार्टर अधिनियम


1833 का चार्टर अधिनियम – भारत का केंद्रीय करण किया गया |बंगाल के गवर्नर को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया |
इसको ब्रिटिश कब्जे वाले सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र पर नियत्रण हो गया | इसकों सैन्य एवं नागरिक शक्तियां दे दिया गया है |लार्ड विलियम बैंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने थे |
गवर्नर जनरल को विधायिका के असीमित अधिकार दे दिया गया |संपूर्ण भारत के लिए कानून बना सकता है |
इस अधिनियम से पहले के कानून को नियामक कानून कहाँ गया | उसके बाद के बने कानून को एक्ट या अधिनियम कहाँ गया |

पिट्स इण्डिया एक्ट


रेगुलेटिंग एक्ट 1773 की कमियों को दूर करने के लिए एक्ट ऑफ सैटलमेंट 1781 पारित किया गया |उसके बाद 1784 में पिट्स इण्डिया एक्ट पारित किया गया | इस एक्ट की महत्वपूर्ण विशेषता इस प्रकार है |
कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यो को पृथक किया गया |कंपनी के राजनैतिक मामलों पर नियंत्रण के लिए नियत्रण बोर्ड ( बोर्ड ऑफ कंट्रोल) नाम से एक निकाय का गठन किया गया | इस प्रकार से  द्वैध शासन की व्यवस्था का आरम्भ किया है |
पहली बार कम्पनी के अधीन के क्षेत्र को ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र कहा गया |
ब्रिटिश सरकार में कम्पनी के कार्यों और इसके प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया गया |यह  नियंत्रण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से किया गया | नियंत्रण बोर्ड भारत के सभी नागरिक सैन्य सरकार व् राजस्व गतिविधियों पर नियंत्रण करें |

नियामक अधिनियम 1773


  1. कंपनी के कर्मचारियो को व्यक्तिगत व्यापार  करने एवं भारतीयों से रिश्वत एवं उपहार लेने से रोका गया | 
  2. पहली बार कंपनी को प्रशासनिक एवं राजनैतिक मान्यता मिली |
  3. कंपनी की गवर्निग निकाय ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के माध्यम से कंपनी पर ब्रिटिश सरकार का  नियत्रण आ गया | क्योकि इस निकाय को कंपनी राजस्व ,नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी देना आवश्यक कर दिया गया |
  4. भारत में केंद्रीय प्रशासन का आरम्भ हुआ | बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बना दिया गया इसकी सहायता के चार सदस्यी कार्यकारी परिषद् का गठन किया गया |
  5. वारेन हेस्टिंग पहले गवर्नर जनरल बने |
  6. बंबई एवं मद्रास के  गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन रखा गया 
  7. भारत में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापन |जिसमे मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त तीन अन्य न्यायाधीश थे |सर एलिज इम्पे प्रथम मुख्य न्यायाधीश बने |




गुरुवार, नवंबर 07, 2019

पलायन हल नहीं है


परीक्षा परिणाम का समय आते ही माता पिता के दिलों की धड़कन बढ़ जाती है । क्योकि  असफल या कम नम्बर पाने वाले बहुत से छात्र आत्म हत्या कर लेते। ऐसे अभागे छात्र जीवन को सही से समझ नहीं पाते है, स्वयं तो मरते ही है साथ मे अपने माता पिता को जन्म भर तड़्पने के लिये छोड देते है।ऐसे कायर लोग अपने समाज के साथ साथ उस परमसत्ता के भी अपराधी होते है। जिसने बडे़ अरमानों के साथ किसी विशेष प्रयोजन से इस धरती पर उन्हें भेजा है। ऐसे लोग जान ले इस संसार जिस प्रकार से दिन के बाद रात -रात के बाद दिन होता है उसी प्रकार सफलता और असफलता का क्रम चलता रहता है। व्यकि अगर जीवन कि छोटी-छोटी असफलता से घबरा कर नकारात्मक विचारों में खो जाये तो उसके जीवन में अवसाद, हताशा और कुंठाघर कर जाती है। उसके लिये जीवन एक बोझ हो जाता है। ऐसे व्‍यक्ति के चारों ओर का माहौल अन्धकार पूर्ण हो जाता उसे कुछ सूझता नही है। जिस कारण वह घबराकर आत्महत्या कर लेता है। पर व्यक्ति अगर इस असफलता को नकारात्मक दृष्टि से न देखे और अपनी असफलता को खोज कर पुनः प्रयास करे तो यह असफलता भी उसके लिये वरदान हो जायेगी। बार बार असफल होने पर भी अपने कर्म को करते रहने वाला व्यक्ति एक दिन महानता कि उचाई को अवश्य छूता है।
संस्कृत के महान व्याकरणाचार्य पाणिनि पाठ को ठीक ढ़ग से याद नहीं कर पाते थे तो एक दिन उनके गुरू ने उनका हाथ देख कर कहा कि तुम्हारे हाथ में तो विद्या रेखा है ही नहीं, तुम यहां पर व्यर्थ में अपना समय न नष्ट करो जायो, कोई काम सीख लो और रोजगार करो। पाणिनि गुरू की आज्ञा से घर को चल दिया, रास्ते में कूएं पर पानी पी रहा था तभी उसकी निगाह रहट पर पड़ी जो पत्थर का होने के बाद भी कोमल सन की रस्सी से बार बार घिसने के कारण निशान पड़ गया था। पाणिनि सोचने लगे जब बार बार घिसने से पत्थर पर कोमल रस्सी से निशान पड़ गया है तो मैं विषय को बार बार दोहरा कर क्यों नहीं याद कर सकता। यह सोच कर पाणनि आश्रम लौट आया और उसी पाणिनि ने आगे चलकर संस्कृत व्याकरण का आधार ग्रन्थ अष्टाध्यायि की रचना कि अतः जीवन निराशा का नाम नहीं है।
व्यक्ति को अपने कर्मों पर भरोसा करना चाहिये हाथ की लकीरों पर नहीं। जिस प्रकार से प्रकृति में सावन और पतझड़ का क्रम लगा रहता है उसी प्रकार जीवन सफलता असफलता का क्रम लगा रहता है। अतः व्यक्ति को आशा नहीं त्यागनी चाहिये क्योंकि आशा जीवन का आधार है। लोग अपनी असफलता के लिये स्वयं को दोषी न मान कर पडोसियों तथा समाज पर उसे डालेगे बात नहीं बनी तो ईश्वर पर डाल दिया। जिसने हमें दो हाथ पैर दिया सोचने के लिये मस्तिक दिया है। उस पर भी बात न बनी तो भाग्य नामक भूत की कल्पना कर उस पर डाल दिया। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि भाग्य नामक वस्तु कहां पर रहती है? हम जो कुछ बोते है वही वही काटते है। हमरी सफलता असफलता के लिये हमारे अलावा कोई दोषी नहीं है क्योंकि हम स्वयं उस परमसत्ता के अंश है जो अनन्त और असीम है। इस किसी अन्य सत्ता मे इतना सामर्थ कहाँ कि हमारे लिये सफलता या असफलता की कामना कर सके। अगर मेहनत करने पर भी हमें सफलता न मिले तो इसका अर्थ है हम मन में कही न कहीं भय या निराशा अवश्य थी। किसी ने ठीक ही कहा है-
सबै भूमि गोपाल कि या मे अट्क कहाँ।
जाके मन मे अटक है,सोई अट्क रहाँ।
हम जो कुछ सोचते है जो कार्य करते है वही कुछ समय बाद सूक्ष्म रूप धारण कर लेता है; मानो बीज रूप है और वही इस शरीर में अव्यक्त रूप में रहता रहता है। वही कुछ समय बाद फल भी देता है। मनुष्य का सारा जीवन इसी प्रकार गढता है। वह अपना अदृष्ट स्वयं ही बनाता है। मनुष्य किसी भी नियम से बद्ध नहीं है। वह अपने नियम में तथा अपने जाल मे स्वयं ही बधा है।–स्वामी विवेकानन्द

बाबर ने कहा था कि ग्रहों की चाल आपकी जमामर्दी और नामर्दी की मोहताज है। हम जमा मर्द है तो ग्रह हमारे अनुकूल हम नामर्द है तो ग्रह हमार प्रतिकूल। महान ज्योतिषाचार्य गर्ग और पराशर ने कहा है कि भाग्य कोई स्‍वतंत्र सत्ता नहीं है वरन वह कर्म के आधीन कार्य करता है। आचार्य भट्टॊसल के अनुसार कर्म ही आपकी सफलता का राज है। इनके अनुसार सफलता के लिये तीन आवश्यक तत्व है।-१. एकाग्रता २.निरन्तरता ३. कुशलता। इन तीनों मे से किसी की भी कमी हमे असफल कर सकती है। अतः हमें एकाग्रता, निरन्तरता के साथ कुशलता बनाये रखना चाहिये और कर्म के पथ पर आगे बढना चहिये। निराशा रूप शैतान को आशा और मेहनत रूपी तलवार से काट कर खडे हो कर बोलो – राम काज किन्हे बिन मोही कहाँ विश्राम।

राष्ट्रकूट राजवंश

दंतिदुर्ग--  राष्ट्रकूट राज्य की स्थापना दंतिदुर्ग ने की थी |
 इसने 752 ई. में चालुक्य शासक कीर्ति वर्मन  को परास्त कर राष्ट्रकूट वंश की नीव रखी |दंतिदुर्ग आधुनिक शोलपुर के निकट मान्यखेट को अपनी राजधानी बनाया|  दंतिदुर्ग( दंतिवर्मन ने )उज्जयनी में हिरण्यगर्भ यज्ञ किया |

राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम( 756- 774)  ने एलोरा का प्रसिद्ध शिव मंदिर का निर्माण करवाया | इसने बादामी के चालुक्यो को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया और वेंगी के  चालुक्यों एवं मैसूर के गंगो को अपने अधीन कर लिया |
ध्रुव धारावर्ष  ( 780- 793)- इसने उत्तर भारत एवं गुजरात के अनेक भागों पर कब्जा कर लिया | इसके लिए इसने त्रिसत्तात्मक सघर्ष किया और प्रतिहार नरेश वत्सराज और पाल शासक धर्मपाल को परास्त किया |ध्रुव ने अपने राज चिन्ह पर गंगा और यमुना को अंकित किया |

गोविंद तृतीय (793 -814ई )--ने कन्नौज के नागभट्ट पर सफल के आक्रमण किया |इसने केरल,पांडय  पल्लव तथा गंग राजाओं के संघ  दमन किया | लंका के  राजा को बंदी बना कर हलापुर लाया | संजन ताम्र पत्र के अनुसार इसने हिमालय तक शासन किया था |इसने मालव कोशल ,कलिंग को भी जीता था |इसने पाल शासक धर्मपाल एवं प्रतिहार शासक नागभट्ट को भी पराजित किया |
अमोघ वर्ष(814-876)  -- गोविन्द तृतीय का पुत्र था |
इसके शासन काल कोई प्रमुख सैन्य उपलब्धि नही रही उसका कारण था कि यह साहित्य एवं कला प्रेमी होना |
इसने अनेक कवियों को संरक्षण दिया जिसमें प्रमुख थे आदि पूरण के लेखक जिन सेन और गणितसार संग्रह के लेखक महावीराचार्य |
यह जैन मत को मानने वाला था |
परन्तु संजन ताम्र पत्र के अनुसार इसने  माता महालक्ष्मी को अपने हाथ की उग़ली चढ़ा दी थी |
माल्यखेद नामक नगर बसाया
  उसने कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध ग्रंथ कविराज मार्ग की रचना की /अमोघ वर्ष ने 68 वर्षों तक शासन किया |
अमोघ वर्ष के पौत्र इंद्र तृतीय ने 915 में महिपाल को परास्त किया
अलमसूदी के अनुसार राष्ट्रकूट राजा बलहारा या वल्लभराज भारत का सबसे प्रतापी रजा था |
अमोघ वर्ष प्रथम की पुत्री चन्द्रोबलाब्बे ने कुछ काल तक रायचूर  दोआब पर शासन किया |

बुधवार, अक्टूबर 30, 2019

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो NCRB

अपराध और अपराधियों की सूचना देने के लिए दुनिया भर में अनेकों सस्थाएँ कार्य करती है । यह सूचनाएइस कारण संग्रहित की जाती है जिससे खोज कर्ताओं को अपराध एवं अपराधियों की पुरानी कड़ियों को जोड़ने में  सहायता मिल सकें।
भारत में इस तरह की संस्था ‘राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो’ NCRB है। NCRB की स्थापना 1986 में टंडन समिति की राष्ट्रीय पुलिस कमीशन एवं गृहमंत्रालय की टास्क फ़ोर्स 1985 की सिफ़ारिशों के आधार पर गृहमंत्रालय के अधीन किया गया ।
 हाल ही में NCRB ने 2017 के अपराधों के आँकड़े प्रस्तुत किए है जो दो वर्ष के विलंब से प्रस्तुत किए गये।
   अपराध से संबंधित आँकड़े इस प्रकार है|
राज्य ख़िलाफ़  अपराध सबसे  अधिक हरियाणा में हुआ उसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य के ख़िलाफ़ अपराध में तीसरे स्थान पर तमिलनाडु था
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में
1  प्रथम स्थान पर उत्तर प्रदेश
2  दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र
3  पश्चिम बंगाल
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों के मामलों में सबसे ज़्यादा घरेलू हिंसा के मामले 33.2%
दूसरे स्थान पर महिला की शीलता को अपमानित करने के मामले 27.37
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के  तीसरे सबसे ज़्यादा मामले आयें है अपहरण के 21%
बलात्कार के मामले 7% 
मध्य प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार की सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किए गये एक लाख महिलाओं में से 14.7
महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया ।
बलात्कार के मामले में दूसरा स्थान छत्तीसगढ़ का रहा। जहाँ एक लाख पर 14.6 महिलाओं के साथ रेप हुआ।
भारत की राजधानी रेप की राजधानी बन गई हैl यहाँ एक लाख में से 12.5 महिलाओं के साथ रेप हुआ है 

रिपोर्ट में बताया गया है कि 277 महिलाओं को रेप के बाद मार दिया गया । 150 बच्चों को रेप के बाद  मार दिया गया ।

रिपोर्ट के अनुसार 2016 के मुक़ाबले 2017में  अपराध के मामले 3.6 %   अधिक दर्ज किये  गये।
अपहरण के मामले 2016 के मुक़ाबले 9% बढ़े है परन्तु हत्या के मामले 5.9% घाटे है । 




शनिवार, फ़रवरी 13, 2016

श्री मद्-भगवत गीता

"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-

ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।

ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

हिन्दी ओलंपियाड की कक्षा 8 की अभ्यास पुस्तिका

  अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड कक्षा-8 अभ्यास प्रश्न अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड कक्षा-8: महत्वपूर...